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योगेश्वर कृष्ण।

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कृष्ण के बारे में लिखने की क्षमता मेरी अल्प बुद्धि में नहीं है न ही मेरी लेखनी में वह सामर्थ्य है जो कृष्ण के गुणों को ‌आपके समक्ष प्रस्तुत कर सके फिर भी इस लेख ‌के ‌माध्यम से ‌मैं आपको कृष्ण के चरित्र लीलाओं और नेतृत्व गुणों को साझा करना चाहूंगा जो उन्हें योगेश्वर बनाती हैं। कृष्ण पूर्णावतार है वह एक प्रेमी, ग्वाले, रासरचैया, बंसीबजाया और‌ माखनचोर है जो ‌ गोकुल की गलियों में लीलाएं करते है। वही एक ओर वह एक निर्माता, दार्शनिक, कुशल राजनेता, योद्धा, नायक और सारथी हैं। कृष्णावतार सामाजिक और दैवीय मान्यताओं को चुनौती देता है वह सामाज में व्याप्त गोरे रंग के लगाव से उलट श्याम वर्ण है वह राजा नहीं है अपितु  ग्वाले या सारथी हैं। वह राधा के प्रेमी है पर पति नहीं उन्हें जन्म देने वाली और पालने वाली माँ भिन्न है। जहाँ राम मर्यादापुरुषोत्तम है वहीं कृष्ण लीलाधर है राम ने सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं का हमेशा आदर किया और हर कीमत पर उनका निर्वाह किया वहीँ कृष्ण ने उन्हें परिस्थिति अनुरूप बदला। शास्त्र भी रामावतार को अनुस्थान प्रधान मानते है वहीं कृष्णावतार को अनुभव प्रधान मानते है। राम ने आचरण...

बुद्ध और विपश्यना

  भगवान बुद्ध का व्यवहारिक ज्ञान आज के युग की सबसे बड़ी पूंजी है। बौद्ध धर्म आज विश्व का चौथा सबसे बड़ा धर्म है और इसकी शुरुआत श्रमण परम्परा से  हुई थी। यह भगवान बुद्ध द्वारा दिया गया ज्ञान धर्म और दर्शन है। बौद्ध धर्म व्यवहारिक ज्ञान पर जोर देता है और वर्तमान परिपेक्ष में बड़ी सहजता से समाहित हो जाता हैं। वैसे तो भगवान बुद्ध ने विश्व को कई ज्ञानप्रद शिक्षाएं दी हैं । परंतु मौन और विपश्यना उन सबसे महत्वपूर्ण हैं। बुद्ध के अनुसार शांति में आत्मा निवास करती है। मौन बहुत ही शक्तिशाली होता है यह हमें सुनने और सुनाने के सक्षम बनाता है। प्रतिदिन कुछ समय मौन रहकर और प्रयासों से मौन को बड़ा कर हम अपने जीवन को सम्मानित कर सकते है। मौन आपको कई मुश्किलों से बचा सकता है।  बिना  अर्थो के शब्दों से मौन बहुत बेहतर है। मौन हमें आत्ममंथन का अवसर देता है। भगवान बुद्ध के द्वारा बताई गई विपश्यना ध्यान पद्धति में भी मौन रहकर ही ध्यान की शुरुआत करनी पड़ती है। विपश्यना ध्यान की एक व्यवहारिक पद्धति है जिससे भगवान बुद्ध को ज्ञानोद्दीप्ति प्राप्त हुई थी। विपश्यना ध्यान में मन में आ रहे व...

नर‌ हो, न निराश करो मन‌ को

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  नर ‌ हो, न निराश करो मन ‌ को हिंदी के महान कवि   मैथिलीशरण गुप्त की यह कविता निराशा के महौल में आशान्वित करती है। महान लेखक ओ हेनरी की कहानी द लास्ट लिफ भी   आशा और ‌ उम्मीद के सहारे सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देती है कहानी की नयिका किस प्रकार एक   पेड़ की आखिरी पत्ती के सहारे जी उठती है और एक ‌ बूढा़ कलाकार किस तरह खिड़की पर पत्ती बना कर लड़की को जीवन दान देता है। इन ‌ दोनों  प्रसंगों ‌ से यह   समझा जा  सकता है कि निराशा के समय आशा और सकारात्मकता ही संभल है।   आज जब सारा विश्व और विशेष रूप से भारत कोरोना महामारी की दूसरी लहर का सामना कर रहा है और हर तरफ निराशाजनक वातावरण   बना। हुआ है हम में से कई लोगों ने अपनों को खोया ,   कई लोगों की नौकरी चली गई कुछ लोग आर्थिक रुप से कमजोर हो गए साथ ही कोरोना ने लोगों को मानसिक दबाव का शिकार बनाया। जिनका नुकसान हुआ है उसकी पूर्ति करना संभव नहीं ...

हुनर और ईमानदारी

  एक   बार   एक   नगर   में   टेक्स   इंस्पेक्टर   शहर   के   सेठ   के   यहाँ   तलाशी   लेने   पहुँचता   है   ।   उसे   देख   सेठ   घबरा कर   फौरन   उसे   रिश्वत   देने लगते है।   पर‌   वह   इंस्पेक्टर   सेठजी   की   सारी   दौलत   और   बहिखातों   की   तफ़तीश करता   है।   आखिर   में   जाते   हुए   जब   सेठजी   उसे   समझौता   करने   को   कहते   है   तब   वह   कहता   है‌   कि   वह   एक   बहरुपिया   है   और उसे   उसके   हुनर   का   इनाम   चाहिए।   उसे   बहरुपिया   जानकर   सेठजी   उस   पर   बहुत   गुस्सा   होते   हैं।   पर   उसके   हुनर   का   सम्मान   कर   उसे   इनाम   भी ...