श्री गणेश


 आज के इस लेख में हिन्दुओं के सबसे लोकप्रिय देवता गणेश जी की बात करते हैं। गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता है वह गजमुख और बड़ी काया वाले है वह समाज में व्याप्त शारीरिक आकर्षण की मान्यताओं को तोड़ते है और बुद्धिमत्ता और सौम्यता पर जोर देतें हैं।

गणेशजी का सौम्य और सुदंर रूप और उनका सहज स्वभाव उन्हें पूज्यनीय बनाता है। हिन्दू धर्म वैसे ‌भी अपने देवी देवताओं से भावनात्मक रुप से जुड़ाव रखने पर जोर देता है और हमारा दिव्यता का अनुभव भी हमें प्रतीकात्मक चिन्हों के माध्यम से ही होता है। यही जुड़ाव हमें हमारे देवी देवताओं के प्रति सहज बनाता है और पीढ़ियों  से हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं जिस में तर्कसंगत बात की अपेक्षा भावनाएँ प्रबल हैं। इसलिए गणेशजी का गजमुख और विशालकाय होना हमें सहज लगता हैं। और उनसे जुड़ी कहानियों पर सहसा ही विश्वास हो जाता हैं।

जब महाभारत जैसा विशाल ग्रंथ लिखने के लिए वेद व्यास जी किसी योग्य पात्र की तलाश में थे। तब उन्होंने यह कार्य गणेशजी द्वारा करवाया क्योंकि वह यह चाहते थे कि इसे लिखने वाला बिना रुके और‌ बिना किसी अवधारणा पूर्वानुमान  और आलोचना के लिखे गणेशजी की सहज बुद्धि और कुशाग्रता उन्हें इस योग्य बनाती है। ऐसे ही एक और प्रसंग में शिव पर्वती के कहने पर‌ विश्व की परिक्रमा करने के स्थान पर वह अपने बुद्धि बल से उन्ही की तीन परिक्रमा कर गणाध्क्षक बनते है यहाँ फिर वह तर्क और बौद्धिक सोच से ज्यादा संवेदनाओं को प्रभावी मानते है। वह तार्किक और भौतिक जगत को छोड़ भावनात्मक और सहज जगत को चुनते हैं। वह जठिल की अपेक्षा सरल को महत्व देतें हैं और बाहरी दुनिया की बजाए स्थानीय दुनिया की परिक्रमा करतें हैं।

गणेशजी का गजमुख और‌ बड़ा सिर बुद्धि और‌ विवेक का प्रतीक है उनके लम्बे कान छोटा मुख ज्यादा सुनने और कम बोलने की शिक्षा देती हैं। वहीं लम्बी नाक और गहरी आँखे सम्मान और एकाग्रता का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह बड़े पेट के साथ अपने में सब समाहित करने की प्रेरणा देतें हैं। मूषक वाहन छोटो की उपेक्षा न करने और अधीनस्थों के प्रति सम्मान का सूचक है। वह सरलता से विध्नों को हरने वाले देवता है।

गणेशजी का व्यक्तित्व हमें युहीं प्रेरणा देता रहे इसी अनुग्रह के ‌साथ गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।

जितेन्द्र पटैल।

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